तन्हा कहीं
आसपास बहुत भीड़ है काबिल किरदारों की ऐसे में कही अजनबी शहर चला जाए बेफिक्री से रहे हर पल ही गुनगुनाते क्यों ना ऐसे किसी अंजान दर चला जाए मुझे तो पसंद है तन्हा तन्हा सा आलम बस आपके ही मुताबिक किधर चला जाए नजर लगते देर नहीं लगती है यहां तो देखो बचाकर फिर नजर चला जाए दीवार ओ दर भी खनकते है यहां अपने किस्सों को छिपा करके निकला जाए ए मेरे दोस्त, मेरे हमदम तू भी सुन ख़ामोश दिलों में ले घुमड़ती सी लहर चला जाए।।
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