लोग क्या कहेंगे
लोग क्या कहेंगे जग में है एक सबसे बड़ा रोग जाने क्या कहेंगे लोग । जिनकी परवाह करते न जाने कितने ही खुद परेशान हुए पूछा तक न था जिन्होंने उनकी सोच की फिक्र के मारे कितने ही घर बर्बाद हुए। दूसरों की कथनी को कितना महत्व दिया गया उनकी ईर्ष्या और द्वेष की भावना को न समझकर स्वयं को ही हीन भाव में लीन किया । रोटी ,कपड़ा, और मकान की खातिर कितने ताने लोग सुनाते गए । तुम ऐसा नहीं ऐसा किया करो इस छद्म व्यंग में अपने ही अपनों को फसाते ही गए । व्यर्थ के प्रलोभन देकर कितने लोगों को अलगाववादी बनाया जिसकी कोई छवि धूमिल नहीं थी उसको भी उलाहने देकर खूब रुलाया । जागो इंसानों स्वयं की शक्तियों और सही गलत को अब स्वयं तुम पहचानो । कब तब करोगे ऐसे दूसरों की परवाह स्वयं के भले और बुरे को देखकर सद्कर्मों को कर डालो । आधुनिक समाज में होड़ मची है आगे होने की हर कार्य हो अपना अपना ही सही क्या आवश्कता है किसी के अच्छे होने की ऐसी नीति रखकर सभी बस छलावा करते हैं। मानवता के दायरों को खूब प्रताड़ित वो करते हैं। प्राचीन काल से हुए जो किस्से जिनसे इतिहास बना । उन्हीं के होते आगे चलकर नवीन सा साज बना । स्वाति की कलम से ✍️
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