काश मैं फिर बच्चा होता
✍️ईश्वर ढकाल काश मैं फिर बच्चा होता, तो हर चीज़ मिलती जो मुझे पसंद है, ना दिल टूटता, ना कोई दूर जाता, हर चेहरा मुस्कान में बस रहता। तब मोहब्बत मतलब थी चॉकलेट बाँटना, ना दर्द, ना धोखा, बस सच्चा लगाव था। अब मोहब्बत में सब कुछ खो गया, बस यादें हैं, और दिल बेहाल सा। काश मैं फिर बच्चा होता, तो तेरे बिना भी मुस्कुरा लेता। एक खिलौने से ही खुश हो जाता, ना तेरी कमी को महसूस करता। अब ये दिल भी समझदार हो गया है, पर सुकून कहीं गुम हो गया है। तू जो हँस दे, तो दुनिया अपनी लगती, तू जो रूठे, तो साँस भी पराई लगती। काश मैं फिर बच्चा होता, तो खुदा से कुछ न माँगता - बस तुझे माँगता, और वो भी मुस्कुराकर दे देता, क्योंकि तब दिल सच्चा था... और हर दुआ पूरी होती थी।
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