" स्वयं "
अरसों बाद आज मैं फिर स्वयं से मिलना चाहती हूँ कितना प्यार है मुझे मुझसे ये चीख चीखकर कहना चाहती हूँ आज एक बार फिर मैं सपनों की दुनिया में जाना चाहती हूँ दुनिया की हक़ीक़त देख ली मैंने अब अलग दुनिया बनाना चाहती हूँ खो गए सारे रिश्ते ... तो ठीक है अब स्वयं को पहचानना चाहती हूँ खो दिया था मैंने स्वयं को कहीं अब उसी ' स्वयं ' को पाना चाहती हूँ कई साल बिता दिए एक कमरे में अब आसमान में उड़ना चाहती हूँ बस एक मौके की तलाश है और फिर पहाड़ों पे दौड़ना चाहती हूँ कब तक किसी को पकड़ के रखूं अब मैं सिर्फ स्वयं को चाहती हूं बाकी सब गूगल पर मिल जाएगा में स्वयं को खोजना चाहती हूं !
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