चौपई छंद, शीर्षक :जीत
मान नहीं तुम यूँ ही हार, कठिन यत्न से पाओ पार। जीत-हार को समझो एक, रखकर धीरज बनकर नेक ।। जीत हेतु हो सतत प्रयास, मन में सदैव रखना आस। आगे बढ़ना अतीत भूल, मानो इसको चिंतन मूल।। करता कोशिश उसकी जीत, दुनिया की यह उत्तम रीत। करता श्रम से जो भी प्रीत, वही जीत का गाता गीत ।।
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