दिवाली की सौगात
जगमग जगमण दीप जले हैं, दीपक से अंधियाँर मिटे हैं। अनार चकरी कि रेल चले हैं, अधरों पर मुस्कान खिले हैं। घर-घर में नवप्रकाश छाया, सब तारों संग चंदा हरषाया। चेहरों पर खुशहाली छाई, दीप मालिका पर्व है आया। नभ से बरसती हैं फुलझड़ियां, आई मिलन की अब ये घड़ियां। द्वार देहरी पर खूब सजा दे, रंगोली फूल मोतिन की सुंदर लड़ियां । स्वच्छता के ये सिलसिले हैं, कोना-कोना क्या खूब धुले हैं। मन का मैल भी मिट जाता है, प्रेम से मिलते जब गले हैं।
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