दोहा
शीर्षक:नारी त्रिया शक्ति की खान है, जाने यह संसार। डाले अपने पुत्र में, उत्तम ये संस्कार।। जहाँ रहे घरनी नहीं, वहाँ भूत का वास। सूना लगता गेह तब, परिजन रहें उदास।। पूजा नारी की जहाँ, वहाँ बसे भगवान। मनु स्मृति का यह है कथन,सत्य इसे सब मान।। नारी गृह संभालती, सहकर कष्ट विशेष। संकट बेला में धरे, यह दुर्गा के वेष।। नारी का सम्मान हो,यह कुल की तकदीर। अब प्रताड़ना बंद हो,ये न बहाये नीर।। नारी को भी चाहिए,रखे वंश का ख्याल। उत्तम करनी ही करे, चलकर सुंदर चाल ।। नरेंद्र सिंह,24.04.2025
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
