...अपने...
जीता रहा मै, अपनी धुन में, दुनिया का कायदा नही देखा। रिश्ता निभाया तो दिल से, कभी फायदा नही देखा। एक किताब की तरह हूँ मैं... कितनी भी पुरानी हो जाए, पर उसके शब्द नहीं बदलेंगे कभी याद आये तो, पन्ने पलट कर देखना... हम आज जैसे है, कल भी वैसे ही मिलेंगे... मैं शून्य हूँ, मुझे पीछे ही रखना......... क्योंकि मेरा फ़र्ज तो सिर्फ मेरे अपनों की कीमत बढ़ाना है.....!!❣️
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
