भोज ए भोज
सर पर चढ़े तनाव खाली आंखों से झलककर होठों की चुप्पी में समाकर छुप जाता। जिम्मेदारियों से लदे कंधे एक पल के लिए कभी झुके नहीं। मुसीबत कितनी भी तगड़ी क्यों ना हो सीना गर्व से हमेशा फूला रहा। अपने बच्चों के खुशी के आगे कदम कभी डगमगाए नहीं।
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