एक रचना
उल्लू बैठता जिस डाल पर, है होता उसका बदहाल। घर में आते रहे दुष्ट यदि, वह बनेगा एकदिन काल।। अगर मूर्ख मानिंद हो जहाँ, मत समझो विकास की आस ब्रह्मा भी नहीं बचा सकते, चाहे जितना करो प्रयास।। जब मूर्ख जहाँ पर मुखर रहे, बुद्धिमान रहता है मौन। माने जाते जाहिल काबिल , उस नगर को बचाये कौन।। नरेंद्र सिंह, गया 15.03.2024
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