सफर
पैर चलते रहे दिल ये थक सा गया यादों का सिलसिला भी रुक सा गया मंजिले ना मिले पास आकर के भी राहें बढ़ती गयी मैं चलता गया तुम मिले ना मिले इसका कुछ ग़म नहीं तुम मिले थे कभी ये भी कुछ कम नहीं इक सबक मिल गया इस सफर में भले इक उम्र खर्च की गम तो इसका हुआ
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