शौकीन जज्बा
तूफान की तरह मचल उठता है मेरा जिया उसकी आवाज में मिलने की बेचैनी सुन। ऐसी थरथराहट शरीर में झिलमिला उठती है जिसे चेहरे की मुस्कान छुपा नहीं पाती। यू तो कविता लिखी है हमने बहुत पर उससे अच्छा काव्य प्रतिभा शायद ही कभी मिले।
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