आखाडा
धौंस ===================== सोच समज कर किसी को धौंस दे, ये दिले नादान, कयामत से कयामत का है ये सफर, कही भारी न पडे । एकाग्रता से भर बैठे नजरो मे आग, काफी समय पहले की है ये बात। नजर मीलाने से पहले, जरा संभल जा, कही जल के ना हो जाये तु, पुरी तरह बरबाद। ईससे पहले की , संभल जा, की तेरी हस्ती ही ना हो जाये, पुरी तरी बेनकाब। पंगा लेने के लिये, तुझे आंडुपांडु मील जांयगे लाखो, ऊलझ ना तु हमसे ये नादान। ऊलझा दुंगा इतना की तु, सुलझ ही न पाये, आखाडे की चपेट मे आके हमारे, हमारे लिये क्या देश क्या विदेश. मैदान मारने का शोक, बचपन से पाला है, बचपन से पाला है. ×××××××××××××××××××××××××× संभल जा प्यारे ये कयामत की रात है, संभल जा प्यारे ये कयामत की रात है ===========================
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