गैर मिलते गले नियामत है
आप सा जो मिला इनायत है, प्यार में है मिली शिनाख़्त है । हाव से वो बता रहा मतलब, बोलने में करे किफ़ायत है । खोलकर कुछ न वो कहे मन की, टोकना भी अजीब आदत है । साथ देते नहीं कभी अपने, गैर मिलते गले नियामत है । जान कर जो बने पराये सम, लाज़िमी चाहिए कुछ रियायत है । कुछ अगर मन में बात मनसीरत, कह न पाओ अगर बग़ावत है ।
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