क्या करू?
क्या करू इस जिंदगी का, ना सुकून का सांस लेना ना सेह सकू उतना दर्द देना, ये तो कर्मो का हिसाब है आज आप का चलता कल शायद मेरा चलना क्या करेगा कोई जी कर एक तो दर्द सहना अपनो को दूर जाते देखना, ये दिल बैठे जा रहा है, सुकून चाहता है, क्या करे चले जाए दूर सबसे भारी भारी सा हो गया है, इस अनजानी धरती पर जीना, जीने के लिए सुकून तो हो बात तो हो, सौगात तो हो संकेत जाधव
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