दील
दील ========================= दील मे एक कसक है, काश मै मंजील पहले ढुंढने नीकलता, आज तुम्हारे आरमान यु.........., यु खामोश नीगाहो से नही देखता। कुछ तो कर जाता तुम्हारे खुषीकी खातीर, तुम्हे यु न आहे भरने देता। वादा रहा सनम मौतने, थोडी देर आगर करली तो, कछ बीगडा नही अभी भी, खाविशे आभी भी जिंदा है, कोई मुश्कील नही है। परिंदे ऊडते है दाना पानी के लिये, और हम आपके सपनोको, ऊचा ऊठाने के लिये। दील मे तुम हो...., तो क्या गम है......, मुश्किले आसान हो जायेगी, बस सिर्फ तुम्हारे लीये। बस सिर्फ तुम्हारे लीये । ===================
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
