अब सौंप दिया
अब सौंप दिया इस जीवन का हर भार तुम्हारे हाथों में, है जीत तुम्हारे हाथों में, है हार तुम्हारे हाथों में। मुझमें तुममें भेद यही, मैं नर हूँ तुम हो नारायण, मैं हूँ संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में। मैंने हर दर्द तुम्हें सौंपा, हर पीड़ा को तुम्हारे चरणों में रखा, तुम ही हो मेरे पथ प्रदर्शक, तुमसे ही मेरी राह सजी। अश्रुओं का सागर, स्वप्नों की नौका, अब तुम्हारे हाथों में समर्पित, मेरा हर कदम, मेरी हर सांस, तुम्हारे आशीर्वाद में सुरक्षित। मैंने खोला हृदय का द्वार, सब कुछ अर्पित तुम्हें किया, अब मैं निश्चिंत, निर्भय हूँ, तुम्हारे प्रेम में बसा। तुम हो सृष्टि के पालनकर्ता, मैं तुम्हारी शरण में आया, मेरे हर सुख-दुख का मालिक, तुम हो मेरे प्रभु, मेरे माया। अब सौंप दिया इस जीवन का हर भार तुम्हारे हाथों में, है जीत तुम्हारे हाथों में, है हार तुम्हारे हाथों में। निश्चित हूँ अब मैं, हर क्षण, हर पल तुम्हारा है, तुमसे ही मेरा अस्तित्व, तुम्हारे प्रेम में सारा संसार है।
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