।। भारत मां के पुजारी ।।
शेर सा साहस है जिनका वतन को अमूल्य समझते हैं । ये कोई आम नहीं , ये वो फरिश्ते होते हैं जिन्हे हम फक्र से जवान कहते हैं ।। जो सीना ताने वहीं खड़े हैं जहां होती बारिश गोलियों की कहते हैं । ये वही परम महावीर हैं जिनकी सरहद ही पहचान है ।। भारत मां के राज दुलारे ये जीवन निस्वार्थ कुर्बान कर देते हैं । ये वही तपस्वी देशभक्त हैं जो "मां" का अर्थ ही "माटी " समझते हैं ।। ये वो फ़ौलाद हैं, ये वही तूफान हैं, जिसने झुकने का नाम सुना नहीं । मरते दम तक जिस महान ने - हार का स्वाद ही चखा नहीं ।। जो तिरंगा के इस विजय ध्वज को अपना कड़क कवच समझते हैं । ये कोई आम नहीं , ये वो फरिश्ते होते हैं जिन्हे हम फक्र से जवान कहते हैं ।। ~~~~~~~~~~~ ~ओम प्रकाश मिश्रा ✍️
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