बुरा इंसान
महज एक हाड़ मास की जिंदा लाश हूं मैं मगर सब कहते है बहुत बुरा इंसान हूं मैं । चल रहा हूं अपने पथ पर कर्म करते हुए तभी तो सबसे ज्यादा दिखता खुशहाल हूं मैं करता हूं हंस कर बात जिसके लिए पहचान हूं मैं बोल देता हूं मन की तभी तो सबके लिए बुरा इंसान हूं मैं, नहीं करता इधर उधर की बातें क्योंकि खुद ही एक खुला आसमान हूँ मैं, इसीलिए तो बुरा इंसान हूँ मैं मेरे चेहरे को देखकर घमंडी कहते है लोग उन्हें क्या पता तकलीफों का सताया हुआ सहमा सा इंसान हूँ मैं, नहीं चलता दिखावे का चौला पहने हुए तभी तो सबके लिए बुरा इंसान हूँ मैं।। समेटे हुए हूँ सब कुछ अपने अंदर लड़ रहा हूं हालातों से समेटे जीवन का चोला इसलिए बन गया हूं आजकल सबसे अनजान मैं तभी सब आकर कहते है बहुत बुरा इंसान हूँ मैं।।
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