सुनो मम्मी
मम्मी,तुम्हारा बेटा मम्मी,तुम्हारा बेटा कामयाब नही हो पाया..... अब ऐसे नाकामयाब नकारा लड़के पे अब भी उतना ही प्यार,दुलार और ममता लुटाओगी क्या...? देखो मम्मी,कैसे टूट गया बेटा तुम्हारा इसे फिर भी अपने पास, अपने आंचल की छाव में ,गले से लगा के घर में ,सबसे लड़ के,सबके व्यंग और तानों को सुन के अपने इस निकम्मे ,नकारा और तुम्हारे लिए कुछ ना कर पाने वाले बेटे को घर में रहने दोगी क्या..? सुनो मम्मी,बाहर कोई समझता नहीं है मुझे... घर में भी कोई समझ न सका मुझे.... अब तुम मुझे समझ के , मेरी पुरानी हुई गलतियों को माफ कर के कामयाब होने के लिए, मुझे एक और मौका दोगी क्या...?
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