टैम पुराना
आज पुराने टेम की बात बताऊं पुराने दिन थारे आज याद कराऊ सबके भीतर मे थी घनी समाई ना यो फालतू का शोर था के यारो मे जिक्र करू वा तो टेम ही और था... सारे खेलन जाया करते पूरी मोज उड़ाया करते घर ते लुकमा बेच के दाने हम बर्फ आली कुल्फी खाया करते हांसी मखौल चाला करता ना किसी के दिल में चोर था के यारो मे जिक्र करू वा तो टेम ही और था.... गर्मियों की छूटी में अपनी बहन के घर वा आया करती। छत पे जाके उसती देखना वा चोरी चोरी बतलाया करती भाई की साली मेरी के लगेगी मेरे दिल में उठता शोर था के यारो में जिक्र करू वा तो टेम ही और था...... दूर तै देख कै दिल समझाते साईकल उठा कै गेडा लाते जाना किते भी होया करता ना रास्ता कोई और था तब मोबाइल वाली झूठी मोहब्बत नही थी यारो तब वो सच्चा सुच्चा लव लैटर का दौर था के यारो मै जिकर करू वा तो टेम ही और था.... मैं बैठा बैठा सोचे जाऊ के दिन वो मुड़ के आवेंगे गुल्लर और बरबंटी जैसे फल कद खाने ने पावेंगे कुएं पे पायल की छम छम बागा में नाचता मोर था के गुलशन निसिंग जिक्र करे वो टेम ही और था... लेखक. गुलशन मीत निसिंग
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