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वो दिन भी क्या दिन थे, हर दिन बैग तेैयार कर school थे भागते, 1 रुपये की चीजें थे लाते, किराया बचा पैदल थे जाते, पूरे रास्ते खूब गप्पे थे मारते, वो दिन भी क्या दिन थे...।। तब किये थे ,हमने साथ खूब मजे, पर्ची बनाकर थे, हम खेलते (राजा, मंत्री, चोर, सिपाही) डांट और डंडे से मार भी खूब थे खाते, पढ़कर जब ना आते, मुर्गा बन खड़े ,बाहर हम रहते, वो दिन भी क्या दिन थे..।। घंटी बजते ही लंच के लिए भागते, टीफिन थे ले जाते, अपना दूसरे को दे, दूसरे का थे खाते, वो दिन भी क्या दिन थे..।। अंताक्षरी खूब थे, खेलते, पीछे बैठने के लिए खूब थे लड़ते, test के दिन चीटिंग भी थोड़ा कर लेते, test copy transfer थे करते, कम marks आने पर अफ़सोस ना करते, हर दिन मानो खूब थे जीते, वो दिन भी क्या दिन थे..।। -@sayaran64 ।। mansi negi ।।
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