ओ बी सी... मेरे भाई...!
मेरे भाई, ओ बी सी. इतना नहीं है आसान बाबासाहब को समझना, जितना पढा है तु अभी तो समंदर की, उपरी हिस्से में पडे हो समंदर की गहरायी का, ज्ञान कहां बंता तु वंस तो तेरा, पढलिखकर होगा बडा पढेंलिखें लोग , क्या खांक संबलेंगे देश... गर संबलना देश को, लिखना पढना सिख चाहता है भारत, पढालिखा नहीं, लिखापढा हो तु लिखपडेगा जबतक, बाबासाहब का राज़ शुरूकरेगा ओ बी सी. समता स्वतंत्रता की बात अब भी वक्त को जाया, ना कर आज समय राहतें संबल , सर पे ना होगा ताज़ बिज बोना काम, कुणबी ही तो तेरा नाम बुधा को भुला दिया तुने, गर्व से लेता हिंदू नाम पिढिदरपिढी छला, ब्राम्हण तुझे भटकाता है छत्तिसकोटी देवताओंके, पिछे तुझे लगाता है ऐसा कैसा रे अनारी, ओ बी सी. मेरे भाई पढलिखकर ना होगा, अब तो जाग निंद सै भाई
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