गझल : तुम ही हो गणेश
तुम ही हो गणेश सबका करता धरता लाडला सबका तुम ही, चाहता भरता तेरे चरणों से सब पाप धूल जाते है सबकी मन्नते तुम ही, पुर्णता करता तुम हो गणेश विधाता सबके दुःख हर्ता परवरदीगार तुम ही, सु:ख दाता भरता नमोस्तुते करता गणेशा तुम्हें हम सारे भूल हुई हमसे तो तुम ही, क्षर्णता करता समंदर भी तेरे इशारे से चलता विघ्नहर्ता विनायक एकदंताय तुम ही, रहता निहारता धनराज नथू बाविस्कर मो.९०१६०३१७१२
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