कोई अपना
घाव बहुत गहरा था बस दिखता नहीं था दिल भी दुखता था पर कोई समझने वाला नहीं था बाद में सब कहते हैं मुझसे तो कह सकते थे पर जब कहना चाहा किसीने सुनना भी नहीं चाहा
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