इंतजार
तेरी बेरुखी से ज्यादा तेरी यादें ज़हरीली हैं, पर शायद ये सितम ये बेमुरव्वत, तेरे लिए मामूली हैं । इसे मैं तेरे इंतजार की हद काहू या इम्तिहा, की मेरी सांस तो कबकी रुक चुकी है मगर आंखे अभी तक खुलीं हैं
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
