सरसी छंद
शीर्षक-- ऐसा हो किरदार। देख लोग जब नत हो आगे, ऐसा हो किरदार। नेक कर्म हो उत्तम जिसका, मान करे संसार।। अनहित उर में कभी न पनपे, परहित जिसका ध्यान। कोई उसका शत्रु न होता, चलता सीना तान।। द्वेष-कपट से जिसकी दूरी, जिसका हृदय उदार। नेक कर्म हो उत्तम जिसका, मान करे संसार।। वही धरा पर पूजा जाता, सच्चा जो इंसान। दुनिया माने लोहा इसका, जग में रहती शान । लोक-वेद अनुकूल चले जो, श्रेष्ठ रहे व्यवहार नेक कर्म हो उत्तम जिसका, मान करे संसार ।। नरेन्द्र सिंह
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