शंकर बनके आना
तुम शंकर बन के आना, मैं कंकर बन के आऊंगी। तुम गीत बन के आना, मैं वाणी बन के आऊंगी। तुम शंकर बन के आना ,मैं कंकर बन के आऊंगी। तुम प्रेम से वादा कर देना, मैं अत्यंत उसे निभाऊंगी। तुम आना गंगा बन के, मैं आऊंगी तुम्हारी आरती बन के। तुम होली बन के आना, मैं गुलाल बन के आऊंगी। तुम शंकर बन के आना ,मैं कंकर बन जाऊंगी। यूं तो पेड़ों से भी पत्ते गिर रहे हैं, तुम सावन बन के आना ,मैं मिट्टी में रच जाऊंगी। और तुम आना हवा की तरह, मैं अपनी गुथ खोल दिया करूंगी। तुम शंकर बन के आना ,मैं कंकर बन जाऊंगी। तुम प्राण बन के आना ,मैं शरीर बन जाऊंगी। तुम आना 7 जन्म लेकर, मैं 16 श्रृंगार ले आऊंगी। तुम शंकर बन के आना, मैं कंकर बन जाऊंगी। तुम शंकर बनके आना,मैं कंकर बन जाऊंगी।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
