शापित
शापित ====================== शापित कर्मोका मारा तो यहा, इच्छाई की लढाई लढनेवाला खुद यहा, कृष्ण कन्हैया भी था, जो आपने आखरी पोलीमे, अपनेही वंशका पतन देख बहोत, दु:खी था. हम तो फिरभी ई़न्सा़न है, तो पुण्याका पलडा भारी रखो, वरणा सबकुछ चुकाना यही पे है. वो बासुरी की धुन मे सवर गया, पर हम ईन्सांनो का क्या? यहा सब कर्मोका खेल है, बाकी तुम समजदार हो, क्या करणा है आपने और, अपनो के साथ.......!, ये तो तुमपर निर्भर है. राम बनकर लंका का दहण, या रावण बणकर सर कटवाना है, क्युकी हर हाल मे सजा तुम्ही को पाणी है, शापमुक्त मोक्ष धाम या......!? या, शापित बणकर नरक,,,,? या शापित बणकर नरक. =======================
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