शीर्षक:सरस्वती वंदना
माँ शारदे!तू मुझ पर जरा ध्यान दे; हे माते ! मुझे ज्ञान का वरदान दे। विद्या दे,सुरलय दे,हे वरदायिनी; बुद्धि मुझे दे, हे माँ विद्यादायिनी। वंदन है,हे भारती,ज्ञानदायिनी, हे श्वेतपद्मासना, वीणाधारिणी; वर दे, हे महाश्वेता ,हंसवाहिनी। जड़ता हरो, हे मातु वीणावादिनी। अज्ञान सागर में,मैं डूब चुका हूँ, अल्पज्ञता से मैं अब ऊब चुका हूँ; मेरी विनती है, ज्ञान मुझमें भर दे, जितने हैं दुर्गुण, माता दूर कर दे। नरेंद्र सिंह 14.02.2024 तिथि वसन्त पंचमी
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