अधूरे
बहुत मांग ली प्यार की भीख हमने अब इन कदमों ने सीख लिया है चलना अकेले। जान दाव पर लगाकर साथ दिया था जिनका वक्त आने पर हाथ खीच लिया था सबने तो हमने खुद का हाथ थमना सीख लिया। रिश्ते निभाने में फर्क सिर्फ इतना था कि उनको हमारे लिए वक्त निकालना पड़ता और हमारा तो सारा वक्त ही उनका था। हमने उनके लिए अपना जुनून त्याग दिया और वो पूछते है तुम्हारा हुनर ही क्या है । वो हमे हमारी खूबसूरती के लिए नकारते रहे और हम उनमें मन की सच्चाई खोजते रहे। दुख की बात तो ये है यारो कि हम उन्हे अपना आदर्श मानते रहे और वो हमे इंसान का वजूद भी ना दे पे।
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