मेहरबानी
बखान क्या करूं मैं तेरी दिलदारी का जब मैने जो मांगा आखिर वहीं तूने दिया दूसरों ने तड़पाया, तूने संभाला दुनिया ने रुलाया, तूने हंसाया धक्के मारकर गिराया गया, तूने गले से लगाया सताया गया, तूने गोदी में सुलाया रूठे रूह को तूने रसिक बनाया हारे हुए को तूने जीताया मरते दिल में जान तूने डाली । पहले तो मेरी नम आंखों ने तूझे रुलाया फ़िर तूने अपनी मंद मुस्कान से मेरा ग़म भूलाया फ़िर भी विडंबना देख इस आवारे दिल की जिस दुनिया से उसे बस ग़म मिला उसी दुनिया को पाने वो तूझे भूल चला । मेहरबानी तेरी! काश वो दुनिया कदम - कदम पे रुलाए ताकी ये नादान दुखी दिल फिर तेरी ओर चले यार बस तू ही तो है कान्हा जिसमें लगकर कोई दिल कभी धोखा नहीं खाता ।
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