हार की पहचान
हार की पहचान सपनों के पंख कट गए, पर उड़ान बाकी है, हार के आँसुओं में छुपी मुस्कान बाकी है। गिरते-गिरते जो संभले, वही जान पाएंगे, अंधेरों में भी जलती एक किरण बाकी है। ठोकरें खाकर गिरना, यही कहानी है, पर हर हार में छुपी एक नयी निशानी है। सपनों के टुकड़ों को जोड़ना है हमें, क्योंकि हर हार के पीछे जीत की रवानी है। हार को गले लगाओ, साथी बना लो इसे, ये ही सिखाएगी रास्ता जीत के किसे। गिरकर संभलने का हौंसला रखो, क्योंकि मंज़िल तक पहुंचने की राह बाकी है।
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