कयामत के दिन निकट
जन-जीवन अस्तव्यस्त है, प्रकृति भी अति संत्रस्त है। धरा भी अब लगी कराहने, विकट स्थिति जो है सामने। पर्यावरण प्रदूषित हो चला , वैश्विक ताप भी बढ़ चला। महा विपदा नहीं अकारण है, इसके सिर्फ दो ही कारण है। बेहिसाब से बढ़ती आबादी, प्रकृति का दोहन व बर्बादी। मानव प्रकृति से खेल रहा है, इसीलिए समस्या झेल रहा है। प्रकृति पर न कोई करो नियंत्रण, जनसंख्या पर हो शीघ्र नियंत्रण। यदि नर स्वयं सुधार नहीं लाएगा, तो जल्द कयामत के दिन आएगा। नरेंद्र सिंह 01.12.2023
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