#चाँद-एक एहसास
सफ़ेद चादर ओढ़े चमकता है रात में, बातें करता होगा वो सितारों के साथ में, खुदा ने जब बनाई होगी कायनात, तो चाँद को ही सबसे खूबसूरत बताया होगा, अंधेरे को रोशनी से रोशन करने के लिए, चाँद को बुलाया होगा, पहली दफा जब निहारा मैंने खूबसूरती के उस टुकड़े को, उस दृश्य ने आशंका में डाल दिया मेरे मन को, मेरे मुखड़े को, वो चाँद पूरा सफ़ेद था पर एक दाग था उसमें काला-सा, लगा मुझे मयंक की शान में गुस्ताखी करने वाला-सा, बचपन में जवाब नहीं था कि वो अटपटा-सा निशान क्यूं चाँद में?, इतनी मनमोहक चीज़ बनाई फिर भी क्यूं ये काला निशान छोड़ दिया भगवान ने चाँद में?, थोड़ा बड़ा हुआ फिर समझ आया कि कुछ भी शत-प्रतिशत निर्मल नहीं होता, दाग चाँद में भी होता है, पर चाँद दर्शाता है चाँद इस कद्र काबिलियत अपनी कि हर दर्शक उसके दोष में नहीं, उसकी रोशनी में खोता है, इससे समझ आया कि गुण सब में होता है, बस बाहर लानी होती हैं खूबियां, और अगर परिश्रम करोगे उसपर तो सोना-चाँदी छोड़ो, पाओगे तुम रूबियां, चाँद सिर्फ एक कुदरत का करिश्मा नहीं, एक एहसास है, अगर प्यासा मैं दर-बदर भटक रहा हूं, तो चाँद ही मेरी प्यास है, अगर हूं मैं कोई संगीत का जादूगर, तो चाँद ही मेरा रियाज़ है, बस अब चाँद ही है वाणी मेरी, चाँद ही मेरा अल्फाज़ है।
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