गरीब से अपने भी कन्नी काटते है
रिश्ते कितने भी निजी खास खून के हो गरीबी उसे कमजोर कर ही देती है; अमीर अगर कितने भी दूर के हो अमीरी रिश्ते जोड़ने को मजबूर कर ही देती है। गरीब के घर उचित भाव सत्कार पाकर भी अपने को लज्जित पाते हैं लोग; अमीरों के यहाँ बिना सम्मान के ही अपने को धन्य-धन्य समझते हैं लोग। निकट के कम औकात के रिश्तेदारों का नाम छिपाने का प्रयास करने लगते हैं लोग; दूर से भी दूर के धनी लोगों को अपने रिश्तेदार बताने लगते हैं लोग। लोग भूल जाते हैं कि यह चक्र है जो आज धनी हैं कल गरीब होंगे वे लोग; जिसे उपेक्षित कर रहे हो गरीब समझकर कल धनी बन सकते हैं वैसे लोग। नरेंन्द्र सिंह 23.01.2024
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