हरकत
हरकत ======================= छोटे हो दील, दीमागसे, और बहुत कुछ बातोसे, चांद को छुना क्या एक तुम्हे, सपना गीरा..... तुम तो सच समझरक बैठ गये, बडे भोले हो दोस्त, क्यु ऐ बचकानी आदते पाले हो. ईन्सान हो ईन्सान बने रहो, बार बार क्यु ये बचकानी सी, बच्चो जैसी जीद करते हो. खुद की गाय मीली है सरकार से मुफ्त मे, उसे तो पहले बांधना सीखो, क्यु दुसरो की सव्वा खंडी गाय, आगंन मे देखकर जलते हो. तरस आता है तुम पर, अपना घर तो तुम्हे संभलता नही है, फिर क्यु, दुसरो के घर मे झाककर, परेशान हाते हो. ये नव्हे दील और अविकसीत दीमाग की , हालत है , ईसे क्यु बार बार दोहराते हो. ये बचकानी आदत है... प्यारे, ईस हरकत को बदल डालो, ईस हरकत को बदल डालो. ===========================
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