है कैसा डर, फ़िक्र किसे है,
गमों ने जब भी घेरा है, मेरे अंतर्मन को छेड़ा है हाथ थामकर, मिलाकर क़दम, मेरा यार साथ जो खड़ा है है कैसा डर, फ़िक्र किसे है, होंसला मेरा बड़ा है जान हथेली पर, मुंह पर शहादत का कलमा है तलवार म्यान में रख, जिगर से लडा़ है है कैसा डर, फ़िक्र किसे है, होंसला मेरा बड़ा है ना हारूंगा मै जंग , सर जब तक धड़ पर पड़ा है हो कलम सर फिर भी, पैरों पर खड़ा है है कैसा डर, फ़िक्र किसे है, होंसला मेरा बड़ा है मै जिस जिस से मिला, यूं लगा, गद्दारों से घिरा हू भरोसा भी जख्मी है, सीना भी छलनी पड़ा है है कैसा डर, फ़िक्र किसे है, होंसला मेरा बड़ा है शोख शहादत का जिसे, खोफ ना नज़र आयेगा लड़ते लड़ते जंग, दुश्मन कायल हो जाएगा है अकेला योद्धा, जो जी जान से लडा़ है है कैसा डर, फ़िक्र किसे है, होंसला मेरा बड़ा है
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