कुंडलियाँ
गैरों की प्रशंसा सुन, तुम्हारा बुरा हाल ; जहँ देखो तहाँ अपना,बजा रहे हो गाल, बजा रहे हो गाल,पर प्रिय लगे पर-निंदा, मानो इस धरा पर,हो इसलिए तू जिंदा। अन्य रसों को छोड़,तुम्हें प्रिय है निंदारस; छोड़ कर नेक कर्म,इसी में रहते हो रत। नरेंद्र सिंह 07.03.2024
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