वक्त
कहाँ चले गए वो दिन जब उनके सूखेपन में भी अपनापन था | ये वक्त,......बस रुखापन छोडकररा कर अपनापन ले गया । जो में देखती, सुनती महसूस करती हूँ उसे कविता में डालू, आसुओं की बजाए चन् शब्दे में लिख लूं ॥
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