हो जाते हैं जब मां बाप बूढ़े
हो जाते हैं जब मां बाप बूढ़े हम उनकी सेवा करने से बचते हैं अपनी चिंता छोड़ कर जो हमारी चिंता करते हैं होते हैं जब वे बीमार कभी न हमसे इसका जिक्र करते हैं क्योंकि खुद से ज्यादा वो हमारी फिक्र करतें हैं सुनकर हमारी बीमारी की खबर दिन रात न सोते जागते हैं क्योंकि ख़ुद से ज्यादा वो हमारी फिक्र करते हैं करते हैं हम बीवी बच्चों के लिए सबकुछ लेकिन कभी न उनके लिए कुछ करते हैं अपनी चिंता छोड़ कर जो हमारी चिंता करते हैं होता है जब हमें अपनी गलती का एहसास तब तक वो चल बसते हैं अपनी चिंता छोड़ कर जो हमारी चिंता करते हैं हो जाते हैं जब मां बाप बूढ़े हम उनकी सेवा करने से बचते हैं अपनी चिंता छोड़ कर जो हमारी चिंता करते हैं प्रशान्त कुमार (The Learner)
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
