जिंदगी
जिंदगी हमसे खफा हो गये , क्या जाने हमको ये सजा दे गयी। अकेले थे हम इन राहो पर, क्या पता युह परछाई , हमसे जुदा हो गयी। ऑखों में पानी था, पर वो बेहना पाया। लोगों को लगते हैं, हम कितने खुशनशिब, उनको क्या पता, नशिब हमारा खाली था। रास्ते पर मिलने वाला, शख्स अपना नही होता। ऑखों में बसने वाला, सपना सपना नही होता। राहत मिली हमको, जब एक आवाज़ दी, मै तुम्हारे साथ हु, उसकी ऐ शिकायत थी। मौत ने बसाया दिल में हमे, वही सपना हुआ पुरा, नही तो नशिब हमारा खाली था।
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