आखिर कब हमारी बात होगी!!
सुनो जरा वो क्या कहतीं है! अब वो रात कभी न होगी मीठी तीखी अपनी बात कभी न होगी न फुंनवा न सपनवा में हाय हेलो टॉक कभी न होगी आ जी सुनती हो; क्या सच में अपनी बात कभी न होगी!! हमारे शिवा ऐसा भी कोई करता है क्या ले जान हथेली पे तुमपे कोई मरता है क्या अब न इठलाना, न बहाना, न ही हमको तड़पाना करती हो क्या याद हमें सच सच ये बतलाना फुंनवा पे अब कब होगा फुसफुसाना हे लाड़ली! आखिर कब हमारी बात होगी दिल की बतियां वाली ऊ रात होगी बतावा न! आखिर कब तोहसे ' हम ' वाली बात होगी!!
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