सफरनामा
सजा कर चांद खुद के आसमां में जो रखा है तुमने, जरा पुछे कोई तुमसे, चमक अब भी बचीं है क्या? कि! हर इक ज़रा समेटा था उस चांद का जिसने , उस शक्श के उन हाथो में कतरा बचा है क्या? सबर राहो में चलते रहने से तो पा लिया होगा उसने, मगर जज्बा यूं ही चलते रहने का अब भी बचा है क्या? 🤔🙃🤔 Rudra Dutt Bhargawa
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