अमर
तुमको किस बात डर है मुझसे मैं कोई कसूरवार थोड़ी हूं मिलने से मना करती हो तुम्हारे रवैए से हैरान थोड़ी हूं तुमसे मिलकर भी मैं कौन सा अमर हो जाएगा बस ज्यादा से ज्यादा तुमसे गले लग जाउगा
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