चौपई छंद
शीर्षक :उत्साह जो मन में रखता उत्साह, सहज रहे तब उसकी राह। जिसके उर में नहीं उमंग, हरपल अंदर करता जंग।। जब दिल में रहता है जोश, वह कभी नहीं खोता होश। याद रखो इकलौता मंत्र, जोश विफल करता षडयंत्र।। जिसके जीवन में उत्साह, पूरी होती उसकी चाह। विजयी होता वह हर जंग, जीवन भर वह रहे अभंग।। ऊँचा पर्वत सकता तोड़, नदी धार को सकता मोड़। नर जो रहता सदा प्रसन्न, वैसे कर्मठ हो न विपन्न।। नरेंद्र सिंह 05.03.2025
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