घुटन
कैद होकर रह गईं मै उसके हजारों झूठ में। चारो दिशाओं से बांध दिया था उसने मेरी आजाद सोच को आसमान को छूते लोहे के पिंजरा में। ख्वाइशों ने सास लेना बंद सा कर दिया और भूल गया था ये मन खुली हवाओं में उड़ने का अहसास ।
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