उल्लाला छंद
मधुर वचन अनमोल हैं मानव वाणी बोलिए, पहले उसको तौलिए। सत्य अरुचिकर त्याग दें, बोल मधुर रस पाग दें ।। शीतलता उर मे रहे, निसृत शब्द को सब सहे। गीता पुराण का कथन, हरपल बोलें मृदु वचन।।1 वचन बड़े अनमोल हैं, अगर मधुर रस घोल हैं। प्यारे बोली बात हो, शब्द से न आघात हो।। नम्र सदा बनकर रहें, कड़वी बोली मत कहें। हरपल इसका ध्यान हो, वाणी से पहचान हो।।2 नरेंद्र
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