।। रो उठा पहलगाम ।।
खून खराबा रोज यहां धर्मों के नाम पर होता है क्यों देश मेरा हर रात यहां आतंक के साए में सोता है मारकर बेबस इंसानों को शैतान अट्टहास करता है सगा संबंधी जो बच गया अपनी लाचारी पर रोता है खून खराबा रोज यहां धर्मों के नाम पर होता है क्यों देश मेरा हर रात यहां आतंक के साए में सोता है बेकसूर निहत्थों पर आतंक काल बन छा जाता है क्रूर निर्दयी राक्षस बन अपना असली रूप दिखाता है अमन और प्रेम का देश मेरा छलनी हो हो जाता है खून खराबा रोज यहां धर्मों के नाम पर होता है क्यों देश मेरा हर रात यहां आतंक के साए में सोता है..... ✍🏻 श्वेता नेमा
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