तालाश खुद की....🫰🏻🌷
शर्त मोहब्बत की थी ..की खुद को है तालाशना मोहब्बत की तालाश में ...मैं खुद को था गुमा चुका रास्ता गलत ना था ...जो मैने खुद ही था चुना शर्त मोहब्बत की थी ..की खुद को है तालाशना मोहब्बत के सफर में.. मैंने जल्दबाजी करदी थी तालाशना है खुद को... ये बात मैंने भुला दी थी बिन किए कोई फिक्र .. मोहब्बत मैं कर चुका था मोहब्बत के सफर में ...खुद को निकल चुका था चलते चलते रास्ते में ...मुस्किलें थी कई आई पर तालाशना है खुद को ...ये मैं ठान चुका था जहां खतम हुआ ये ...हसीन सा ये रास्ता देखा नज़र उठाके ...तो मोहब्बत के मैं पास था सामने थी वो मेरे ...मैं हिम्मत जुटा पाया ना थी नजरों के सामने ...मैं खड़ा उसके पास था बिलकुल ना थी रूबरू ...वो मुझसे अनजान थी पर थी वो मोहब्बत मेरी ...और वो मेरी जान थी धीमे धीमे से मैं देखो ...यहां तक आया था ये आश्चर्य सा माहौल अब ...मेरे दिल को भाया था मुश्किलें थी बहुत आई ... पर में ना डगमगाया था उसके साथ चलने का मैंने ...रास्ता जो अपनाया था अनबन भी होती थी ....और अब भी हो जाती है ये तो घर घर की कहानी है ... आखिर हो ही जाती है तालाशना था खुद को मैंने ... मैंने तालाश है लिया मोहब्बत का इज़हार मैंने ... प्रभु के नाम से किया शर्त मोहब्बत की थी ..की खुद को है तालाशना.... 🫰🏻🌷 :~ Himanshu Bhardwaj / vo
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